दृष्टिबाधितों के मामले में प्रदेश में बिलासपुर जिला अव्वल है। एनडीआरपीडी की सर्वेक्षण रिपोर्ट बताती है कि यहां तीन हजार 9 सौ 63 दृष्टिबाधित हैं। यही कारण है कि सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एजेंसी तय कर दी है। एलिम्को के जरिए शारीरिक विकलांगता का परीक्षण किया जाएगा और पूरी रिपोर्ट केंद्र सरकार को दी जाएगी।
चौंकाने वाली बात ये है कि जिले की कमोबेश सभी तहसीलों में इनकी संख्या सैकड़ों में है। वर्ष-दर-वर्ष यह आंकड़ा बढ़ते ही जा रहा है। अचरज की बात ये है कि केंद्र व राज्य शासन की योजनाएं भी इन तक सही ढंग से नहीं पहुंच पा रही हैं।
एनटीआरपीडी की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार दृष्टिबाधितों के मामले में बिलासपुर के बाद कोरिया व राजनांदगांव का नंबर आता है। समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो बिलासपुर जिले में 3 हजार 963 नेत्रहीन हैं। दुःखद पहलू ये कि पूरी जिंदगी दूसरों के सहारे बसर करने के लिए मजबूर व विवश हैं।
चौंकाने वाली बात ये है कि जिले की कमोबेश सभी तहसीलों में इनकी संख्या सैकड़ों में है। वर्ष-दर-वर्ष यह आंकड़ा बढ़ते ही जा रहा है। अचरज की बात ये है कि केंद्र व राज्य शासन की योजनाएं भी इन तक सही ढंग से नहीं पहुंच पा रही हैं।
एनटीआरपीडी की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार दृष्टिबाधितों के मामले में बिलासपुर के बाद कोरिया व राजनांदगांव का नंबर आता है। समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो बिलासपुर जिले में 3 हजार 963 नेत्रहीन हैं। दुःखद पहलू ये कि पूरी जिंदगी दूसरों के सहारे बसर करने के लिए मजबूर व विवश हैं।
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