क्षेत्र में उत्पात मचा रहो हाथियों ने पिछले तीन माह में 50 से अधिक परिवारों को बेघर कर दिया है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले कोरवा जनजाति के ही 16 परिवार गांव छोड़कर नए स्थान पर आशियाना बनाने भटक रहे हैं। हाथियों के खौफ से ग्रामीण रतजगा कर रहे हैं। वहीं शासन-प्रशासन की अनदेखी और असंवेदनशील ग्रामीणों की परेशानी को बढ़ा रहे हैं।
फरसाबहार विकासखंड के तीन गांव महुआडीह, जामटोली और भेलवा में पिछले तीन माह से हाथियों का उत्पात जारी है। हाथी इतने लंबे समय तक एक ही स्थान पर नहीं ठहरते लेकिन हाथियों के इस प्रकार इन्ही गांवों ठहर जाना लोगों में दहशत का बड़ा कारण साबित हो रहा है। हाथियों द्वारा क्षेत्र में मचाए जा रहे उत्पात को इसी बात से समझा जा सकता है कि तीन माह में हाथियों ने तीन गांव के 50 घरों को ध्वस्त कर दिया है।
सबसे अधिक आहत कोरवापारा में जनजातिय परिवार हुए हैं यहां 16 परिवार के गांव में एक भी घर नहीं बचा है। कोरवापारा में कुल 16 कोरवा और मुंडा जाति के परिवार रहते थे, जिनके मकान ही नहीं बल्कि घर में रखे अनाज आदि भी नष्ट हो गए हैं ऐसे में मलबे में बचे कुछ समानों को लेकर परिवारों को गांव ही छोड़ना पड़ गया। स्थिति यह है कि गांव में रहने वाले लगभग सौ लोग आज पास के मुख्य मार्ग के किनारे फिर से अपना मकान बनाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं।
फरसाबहार विकासखंड के तीन गांव महुआडीह, जामटोली और भेलवा में पिछले तीन माह से हाथियों का उत्पात जारी है। हाथी इतने लंबे समय तक एक ही स्थान पर नहीं ठहरते लेकिन हाथियों के इस प्रकार इन्ही गांवों ठहर जाना लोगों में दहशत का बड़ा कारण साबित हो रहा है। हाथियों द्वारा क्षेत्र में मचाए जा रहे उत्पात को इसी बात से समझा जा सकता है कि तीन माह में हाथियों ने तीन गांव के 50 घरों को ध्वस्त कर दिया है।
सबसे अधिक आहत कोरवापारा में जनजातिय परिवार हुए हैं यहां 16 परिवार के गांव में एक भी घर नहीं बचा है। कोरवापारा में कुल 16 कोरवा और मुंडा जाति के परिवार रहते थे, जिनके मकान ही नहीं बल्कि घर में रखे अनाज आदि भी नष्ट हो गए हैं ऐसे में मलबे में बचे कुछ समानों को लेकर परिवारों को गांव ही छोड़ना पड़ गया। स्थिति यह है कि गांव में रहने वाले लगभग सौ लोग आज पास के मुख्य मार्ग के किनारे फिर से अपना मकान बनाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं।
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