आदिवासियों का मस्ती भरा सांस्कृतिक पर्व भगोरिया का आगाज 27 फरवरी से हो गया है। यहां भगोरिया 27 फरवरी से प्रारंभ होकर 5 मार्च तक चलेगा। इस दौरान पूरे सप्ताह मांदल व ढोल पर थिरकते समूह उल्लास के साथ पर्व मनाएंगे। बसंत के आते ही होली उत्सव की तैयारियां ग्रामीण अंचल में छाने लगती है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के कारण इस पर्व की महत्ता और भी बढ़ जाती है।
आदिवासी संस्कृति व भगोरिया हाट प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है। भगोरिया मैला व आदिवासी संस्कृति को देखने के लिए बाहर से कई लोग आते है। इस उत्सव का पूरा आनंद युवा वर्ग लेता है। इस उत्सव में क्षेत्र के ही नहीं, बल्कि बाहर के भी संस्कृतिप्रेमी भाग लेंगे। यह पर्व सीधे तौर पर कानून व्यवस्था की स्थिति का भी इम्तिहान लेगा, क्योंकि हर भगोरिया मेले में जबर्दस्त भीड़ उमड़ती है।
28 फरवरी को बामनिया में भगोरिया हाट
झाबुआ जिले के बामनिया में 28 फरवरी शनिवार को भगोरिया हाट लगेगा। इस दिन यहां हाटबाजार में धूम मचेगी। हाट बाजारो में लोक संस्कृति की अमिट छाप स्पष्ट दिखाई देती है। भगोरिया हाट बाजारो को प्रणव उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। इन हाट बाजारो में हर आदिवासी पुरूष व महिला अपने पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर आते है। महिला व पुरूष वर्ग की टोलीयां ढोल-मादंल, थाली लेकर बाजारों में आते है। इनकी थाप पर ताल के साथ अपने पारंपरिक लोक नृत्य करते हुए हाट बाजारो का आनंद लेते है।
आदिवासी संस्कृति व भगोरिया हाट प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है। भगोरिया मैला व आदिवासी संस्कृति को देखने के लिए बाहर से कई लोग आते है। इस उत्सव का पूरा आनंद युवा वर्ग लेता है। इस उत्सव में क्षेत्र के ही नहीं, बल्कि बाहर के भी संस्कृतिप्रेमी भाग लेंगे। यह पर्व सीधे तौर पर कानून व्यवस्था की स्थिति का भी इम्तिहान लेगा, क्योंकि हर भगोरिया मेले में जबर्दस्त भीड़ उमड़ती है।
28 फरवरी को बामनिया में भगोरिया हाट
झाबुआ जिले के बामनिया में 28 फरवरी शनिवार को भगोरिया हाट लगेगा। इस दिन यहां हाटबाजार में धूम मचेगी। हाट बाजारो में लोक संस्कृति की अमिट छाप स्पष्ट दिखाई देती है। भगोरिया हाट बाजारो को प्रणव उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। इन हाट बाजारो में हर आदिवासी पुरूष व महिला अपने पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर आते है। महिला व पुरूष वर्ग की टोलीयां ढोल-मादंल, थाली लेकर बाजारों में आते है। इनकी थाप पर ताल के साथ अपने पारंपरिक लोक नृत्य करते हुए हाट बाजारो का आनंद लेते है।
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