सियरा लियोन के एक अस्पताल में जे आर्चर इबोला के मरीजों का इलाज कर रहे थे। सितंबर में पश्िचमी अफ्रीकी इबोला का यह चरम था। वह यूरोपियन संगठन की डॉक्टर्स विथआउट बॉर्डर टीम के साथ्ा यहां गए थे। मगर, मुसीबत यह थी कि डॉक्टरों को हाई रिस्क वाले जोन में जाने से पहले मून सूट की जैसा पॉलीथीन का सूट, दस्ताने, मास्क और चश्मे पहनने पड़ते थे, ताकि वे संक्रमण से बचे रह सकें।
वहां 90 डिग्री फारेनाइट तापमान पर उस सूट को पहनकर एक घंटे से अधिक समय तक डॉक्टर नहीं रह सकते थे। उस गर्मी में त्वचा जलने लगती थी। सूट पहनकर रोगियों के इलाज से अधिक समय उनकी मामूली जानकारियां दर्ज करने में खर्च हो जाता था। यह थकाऊ, लेकिन जरूरी काम का हिस्सा था क्योंकि इस महामारी के कारण 10 हजार से अधिक मौते हों चुकी थीं।
वहां 90 डिग्री फारेनाइट तापमान पर उस सूट को पहनकर एक घंटे से अधिक समय तक डॉक्टर नहीं रह सकते थे। उस गर्मी में त्वचा जलने लगती थी। सूट पहनकर रोगियों के इलाज से अधिक समय उनकी मामूली जानकारियां दर्ज करने में खर्च हो जाता था। यह थकाऊ, लेकिन जरूरी काम का हिस्सा था क्योंकि इस महामारी के कारण 10 हजार से अधिक मौते हों चुकी थीं।
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