Thursday, 26 February 2015

रेल बजट : 'प्रभु' से टूटी छत्‍तीसगढ़ के लोगों की उम्‍मीदें

छत्‍तीसगढ़ के लोगों को रेलमंत्री सुरेश प्रभु से नई ट्रेन मिलने की उम्‍मीद रेल बजट में टूट गई। लोग चाहते थे कि प्रभु की नजर राज्‍य के उन हिस्‍सों पर पड़े जहां आजादी के करीब 68 साल बाद भी ट्रेनें नहीं पहुंच पाई हैं।


राज्य की जनता गोवा, इंदौर, जैसलमेर और चेन्नई के लिए सीधी यात्री ट्रेन चाहती थी। वहीं नई दिल्ली और मुंबई सहित अन्य शहरों के लिए नई ट्रेनों के साथ राज्य में यात्री सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद थी। वह भी इस रेल बजट में पूरी नहीं हुई।


यह थी अपेक्षाएं जो पूरी नहीं हो पाईं

जगदलपुर- देश में रेलवे के नक्शे पर 48 साल पहले स्थान बना चुके बस्तर के लिए हाल के सालों में रेल बजट में घोषित नई रेललाइनें कागजों में ही सिमटी रह गई। नई रेल लाइनों के लिए अभी तक सर्वे भी शुरू नहीं हो पाया। यात्री ट्रेनों का विस्तार हो या फिर कोरापुट-जगदलपुर रेल लाइन का दोहरीकरण, सभी मांगें ठंडे बस्ते में ही रहा। अशांत बस्तर से होकर चलने और गुजरने वाली ट्रेनों की समय सारिणी में बदलाव के लिए भी बस्तर की जनता लंबे अरसे से मांग करती आ रही थी, वह भी पूरी नहीं हुई।

अभी भी कई मांगे लंबित रह गईं जिनमें रावघाट-जगदलपुर-दल्लीराजहरा, किरंदुल-खम्मम, किरंदुल-बीजापुर, जैपुर-मलकानगिरी, मलकानगिरी-सुकमा-दंतेवाड़ा, जूनागढ़-नवरंगपुर-कोटपाड़, धमतरी-कांकेर, धमतरी वाया नगरी-माकड़ी-कोंडागांव आदि शामिल हैं। कभी वन क्षेत्र का रोड़ा तो कभी फंड का रोना और अब नक्सली बाधा का बहाना रेललाइनों के रास्ते में रोड़ा बने रहा।

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