Wednesday, 18 March 2015

क्‍या मोदी सरकार सुन रही है आंदोलनों की आहट...

मौसम में अभी भले ही ठंडक हो, लेकिन सामाजिक और सियासी हल्के में तपिश लगातार बढ़ती जा रही है। मोदी सरकार के खिलाफ ये तपिश अभी और बढ़ेगी इसके साफ सकेंत मिल रहे हैं। भूमि अधिग्रहण अध्यादेश, किसानों की फसलें खराब होना का मुद्दा, जाट आरक्षण जैसे कई मुद्दों पर देशव्यापी आंदोलनों की आहट साफ सुनी जा सकती है। मोदी सरकार के लिए आंदोलनों की ये आहट खतरे की घंटी है।

जाटों ने कसी कमर

बरसों आंदोलन कर जाटों ने जो आरक्षण हासिल किया था, वो एक झटके में खत्म हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग कोर्ट में मिलने वाला आरक्षण रद कर दिया है। ऐसे में जाटों ने आंदोलन के लिए फिर कमर कस ली है। जाटों को कहना है कि वो आरक्षण के लिए फिर कोर्ट से सड़क तक लड़ाई लड़ेंगे। देशव्यापी आंदोलन कर केंद्र सरकार पर दबाव बनाएंगे। पिछली बार जब जाट आंदोलन करने सड़कों पर उतरे थे, तो कई राज्य थम-से गए थे। इस दौरान पुलिस के साथ झड़प में तीन जाट लोग मारे भी गए थे। जाट आरक्षण का मामला खारिज होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आंदोलन की स्थिति बनने भी लगी है। विरोध स्वरूप सम्मेलन, प्रदर्शन, सड़क जाम, रेल रोको आदि का दौर शुरू हो गया है। इसी के चलते मथुरा में विरोध के लिए सड़क पर उतरे ग्रामीणों ने एक्सप्रेस-वे पर राया के पास जाम लगाया। टोल और फेसिलिटी सेंटर पर वाहन रोक दिए। पुलिस और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात काबू किए। भाकियू मुखिया राकेश टिकैत का कहना है, 'सरकार कुल्हाड़ी लेकर घूम रही है। इसने पहले किसानों का सिर काटा अब जाटों का। लेकिन हम संघर्ष करेंगे।' उधर पूर्व मंत्री चौधरी अजित सिंह का कहना है कि सरकार को किसानों और पिछड़ों से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए हम जनता के साथ खड़े हैं खड़े रहेंगे।

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